कुछ पंक्तियां इस ब्लॉग के बारे में :

प्रिय पाठक,
हिन्दी के प्रथम ट्रेवल फ़ोटोग्राफ़ी ब्लॉग पर आपका स्वागत है.….
ऐसा नहीं है कि हिन्दी में अच्छे ब्लॉग लिखने वालों की कमी है। हिन्दी में लोग एक से एक बेहतरीन ब्लॉग्स लिख रहे हैं। पर एक चीज़ की कमी अक्सर खलती है। जहां ब्लॉग पर अच्छा कन्टेन्ट है वहां एक अच्छी क्वालिटी की तस्वीर नहीं मिलती और जिन ब्लॉग्स पर अच्छी तस्वीरें होती हैं वहां कन्टेन्ट उतना अच्छा नहीं होता। मैं साहित्यकार के अलावा एक ट्रेवल राइटर और फोटोग्राफर हूँ। मैंने अपने इस ब्लॉग के ज़रिये इस दूरी को पाटने का प्रयास किया है। मेरा यह ब्लॉग हिन्दी का प्रथम ट्रेवल फ़ोटोग्राफ़ी ब्लॉग है। जहाँ आपको मिलेगी भारत के कुछ अनछुए पहलुओं, अनदेखे स्थानों की सविस्तार जानकारी और उन स्थानों से जुड़ी कुछ बेहतरीन तस्वीरें।
उम्मीद है, आप को मेरा यह प्रयास पसंद आएगा। आपकी प्रतिक्रियाओं की मुझे प्रतीक्षा रहेगी।
आपके कमेन्ट मुझे इस ब्लॉग को और बेहतर बनाने की प्रेरणा देंगे।

मंगल मृदुल कामनाओं सहित
आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त

डा० कायनात क़ाज़ी

Wednesday, 26 October 2016

Hotel review:The Pride Plaza, Aerocity, New Delhi

Hotel review:The Pride Plaza, Aerocity, New Delhi

The Pride Plaza, Aerocity, New

  • Classification: Five Stars

  • Room Category: Premium Rooms

  • Month of Stay: October

Overviewwelcome drink at The Pride Plaza, Aerocity, New Delhi

I was travelling continuously for a month and did not have enough time to relax. To prepare myself for my next trip which was going to be equally hectic, I felt the need to refresh and rejuvenate myself. I decided to stay at The Pride Plaza hotel located in the newly developed area near the Indira Gandhi Airport New Delhi. What is great about The Pride Plaza is that it offers luxury at affordable prices and is situated in a prime location.

Check-in process:

It was very amicable and hassle free process. The Staff and concierge were well behaved and very helpful. I was royally escorted till my room. I had to catch my flight next morning. So I requested them to get my tickets print out. By the time I finished my welcome drink the tickets were printed out and presented to me.

The Room

The Pride Plaza, Aerocity, New

I checked in majestic Premium Rooms. It was a pool facing room on the 6th floor. It was very aesthetically done. My room was a good size for Aerocity, New Delhi, and the king size bed was so cozy and comfortable. The bed was perfectly made up with starched and clean white sheets and cute little pillows. The walls of the room were decorated with the big size pictures of the monuments of Delhi, a perfect blend of the heritage & modernity. Room was equipped with flat screen LCD TV and a mini bar.

The bathroom was well maintained and to make the stay more luxurious they had provided world class toiletries and bathroom accessories like bath robe and sleepers.

The food

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I would say it was the best part of my stay. The Pride Plaza in the Aerocity is the only Hotel serving ethnic Indian dishes. And they are maintain the feel of Indian culture with a finest blend of modernity. I had the opportunity to try the Mughlai cuisine prepared by the Master chef- Shailendra. He belongs to Lucknow so carries the perfect taste of the traditional recipes in all the preparations.  Chef was flaunting his culinary talent by serving the delicacies one by one. It was really very difficult for me to decide which dish was the best.

I enjoyed my food in The café pride, the all-day dining restaurant just like it’s name was elegant, classy and exquisite.

The have one more restaurant- ORIENTAL SPICE for delicacies from the Far East. It also has a live kitchen. I had my dinner at Orient Spice. It was simply delicious.

The Spa

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I planned my visit for relaxing and rejuvenating, hence going to the spa had to be in my itinerary. When I saw the board of the world class spa- ORA REGENESIS SPA in the lobby I could not resist myself. I booked it immediately to pamper myself. The ambience of the spa was very calm and soothing. The low lights, essential oils aroma, classy décor and skilled therapist what else could one wish for!

My therapist Maxi was a beautiful girl from North east. A bright smile on her face and gentle touch was making me relax in each step. It was such a good place to unwind and relax at the end of the long day. They have a wide range of massages right from Indian to Turkish, Swedish etc. that one should definitely try.


The Location

Let me tell u more about Aerocity. The Aerocity is the part of The Delhi Aerocity project spread over 45 acres and was proposed by GMR Group led Delhi International Airport Ltd (DIAL) in 2006 as part of the modernization plan of the Indira Gandhi International Airport. The plan included setting up of 12 hotels with a capacity of around 4,000 plus rooms in both luxury and budget categories. The Pride Plaza is one of them. It is less than a kilometer away from the INDIRA GANDHI INTERNATIONAL AIRPORT and at  a stone’s throw away from Aerocity Metro station, which is well connected with all the tourist attractions, shopping malls, New Delhi Railway Station and National Bus Station.

Pool at The Pride Plaza, Aerocity, New Delhi

Overall The Pride Plaza Hotel was the perfect location for a stay in Delhi. The staff I can’t forget were extremely helpful and courteous from the moment we stepped inside and did everything to make us comfortable. It was indeed an experience that would stay in my memory for a long time.

Monday, 24 October 2016

गुजरात में नवरात्रि की धूम

[caption id="attachment_7885" align="aligncenter" width="1800"]cultural-festivals/navratri-festival-Gujrat Girls doing Garba in Navratri festival of Gujarat[/caption]

गुजरात में नवरात्रि की धूम

भारत देश ऋतुओं का देश है। हम खुशकिस्मत हैं कि हम हर मौसम का मज़ा उठा पाते हैं। यहाँ हर मौसम साथ लाता है अपनी खुशबू समेटे हुए तीज त्यौहार। इस देश में हर मौसम के अलग त्यौहार हैं। तेज़ गर्मी के बाद रिमझिम-रिमझिम फुहार धरा को भिगो देती है। तपती धरती इसका स्वागत झूलों से और सावन के गीतों से करती है। बारिश का ऐसा स्वागत कि फिर बदली भी जम के बरसती है। और तब तक बरसती है जब तक धरती का पोर-पोर भीग न जाए। बारिश के बाद धीमें धीमें क़दमों से चल कर शरद ऋतु हमारे दरवाज़े आ खड़ी होती है और अपने साथ ले आती है त्योहारों का खज़ाना। त्यौहार जो जीवन में उमंग भरते हैं, रंग भरते हैं। इसी कड़ी में सबसे पहले आती है शक्ति का प्रतीक पर्व नवरात्रि, और पूरा देश नवरात्रि की तैयारियों में लग जाता है। देश के पूरबी हिस्से में बसा बंगाल जहाँ यह पर्व दुर्गा पूजा के रूप में मनाता है वहीं पश्चिम में बसे गुजरात में नवरात्रि उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

हमारे देश में त्योहारों का महत्व ऐसे ही नहीं है। हर त्यौहार के पीछे एक सन्देश छुपा होता है। अब नवरात्रि को ही लीजिये। यह पर्व है नारी के सम्मान का। नारी शक्ति का। समृद्धि का, विश्वास और आस्था का।

[caption id="attachment_7886" align="aligncenter" width="1024"]cultural-festivals/navratri-festival-Gujrat Folk dance Garba in Navratri fastival Gujarat[/caption]

क्यों मनाया जाता है नवरात्रि उत्सव?

भारत किस्से कहानियों का देश है, यहाँ पौराणिक कहानियां सदियों से हमारे जीवन का अंग बनी हुई हैं। ऐसी ही एक पौराणिक कथा के अनुसार बहुत पहले की बात है। एक राक्षस था जिसका नाम था महिषासुर। वह भगवान शिव का परम भक्त था। उसने कड़ी तपस्या कर भगवान शिव से यह वरदान माँगा कि उसे कितना भी शक्तिशाली पुरुष हो नहीं मार पाएगा। इस वरदान से महिषासुर के पास अपार शक्तियां आ गईं और वह घमंड में चूर हो देवताओं को परेशान करने लगा। उसके पास इतनी शक्ति थी कि तीनों देव ब्रह्मा, विष्णु व महेश भी उसे हराने में असमर्थ थे। पूरा देवलोक महिषासुर के आतंक से परेशान हो उठा। महिषासुर को यह वरदान प्राप्त था कि उसे कोई पुरुष नही मार सकता इसलिए सभी देवताओं ने अपनी-अपनी शक्तियों को मिलाकर दुर्गा को बनाया। अनेक शक्तियों के तेज से जन्मीं माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया और वह महिषासुरमर्दिनी कहलाईं। इसी लिए यह पर्व बुराई पर अच्छी की जीत के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व नारी शक्ति का प्रतीक है।

[caption id="attachment_7888" align="aligncenter" width="1800"]cultural-festivals/navratri-festival-Gujrat-2 Garba in Navratri festival Gujarat[/caption]

जिस तरह दुर्गा पूजा के लिए बंगाल मशहूर है उसी तरह नवरात्रि उत्सव का नाम आते ही गुजरात का नाम लिया जाता है। अगर आप भी नवरात्रि का मज़ा उठाना चाहते हैं तो एक बार गुजरात में नवरात्रि ज़रूर मनाने जाएं। नौ दिन चलने वाला यह महोत्सव विश्व का सबसे बड़ा डांस फेस्टिवल माना जाता है। यह पर्व है लोगों का और उनके उल्लास का। जैसा कि इसके नाम से ज़ाहिर है, नव माने नौ और रात्रि माने रात। नौ रातों तक चलने वाला यह उत्सव रोशनियों और खुशियों को समेटे हुए है। गुजरात में हर जगह छोटे बड़े पंडालों में लोग गरबा नृत्य करने आते हैं।

[caption id="attachment_7891" align="aligncenter" width="1800"]cultural-festivals/navratri-festival-Gujrat-6 Folk dance- in Navratri festival Gujarat[/caption]

नवरात्रि की धूम गरबा के संग

दोस्तों नवरात्रि उत्सव के असली रंग देखने हों तो चलिए गुजरात। गुजरात एक ऐसा राज्य है जहाँ नवरात्रि का त्यौहार गरबा और डांडिया रास के साथ मनाया जाता है। इस राज्य में माँ अम्बा को विशेष रूप से पूजा जाता है। और ऐसा माना जाता है कि माँ अम्बा को गरबा बहुत प्रिये है, इसी लिए माँ अम्बा को प्रसन्न करने के लिए लोग गरबा करते हैं। माँ दुर्गा की आरती के साथ नवरात्रि उत्सव का शुभारम्भ किया जाता है।

गरबा के साथ डांडिया रास श्री कृष्णा और गोपियों की याद में किया जाता है। गुजरात में वैसे तो हर छोटे बड़े शहर, गांव क़स्बे में गरबा किया जाता है लेकिन सबसे बड़ा गरबा बड़ोदा शहर में होता है। गरबा की धूम महीनों पहले से लोगों में ऊर्जा भर देती है। लड़के और लड़कियां गरबा के लिए डांस क्लासेज ज्वाइन करते हैं और जम कर मेहनत करते हैं। ताल से ताल मिला कर, बिना एक बीट मिस किए गरबा करना सरल नहीं है।

नौ रातों तक चलने वाला इस डांस फेस्टिवल का युवाओं में बड़ा क्रेज़ है। यह लोग हर रोज़ एक नए डिज़ाइन के कॉस्टयूम में सज कर गरबा खेलने अलग अलग पंडालों में जाते हैं। ये झिल-मिल करते कॉस्टयूम किराए पर उपलब्ध होते हैं। जिनका किराया एक हज़ार से पांच हज़ार रूपए रोज़ का होता है।

गरबा का है कुछ ख़ास अर्थ

गुजरात में जगह जगह गरबा खेलने के लिए पंडाल बने होते हैं। मैंने ऐसे ही एक पंडाल में पूरे जोश से गरबा करने वाली मीनल से गरबा के इतिहास के बारे में जानने की कोशिश की, मीनल ने बताया- गरबा शब्द गर्भ-दीप से लिया गया है। हमारे यहाँ नवरात्रि के पहले दिन एक मिटटी का घड़ा स्थापित किया जाता है। जिसमे एक चांदी का सिक्का और दीपक रखा जाता है। इस दीपक वाले घड़े को दीपगर्भ कहते हैं। इसके साथ ही नवरात्रि उत्सव की शुरुवात होती है। युवतियां रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर मां शक्ति की उपासना करती हैं। लड़कियाँ कच्चे मिट्टी के सछिद्र घड़े को सजाकर उसके चारों ओर नृत्य करती हैं, और गरबा नृत्य प्रस्तुत करती हैं। गर्भ दीप नारी की सृजनशक्ति का प्रतीक है और गरबा इसी दीप गर्भ का अपभ्रंश रूप है। समय के साथ गरबा का स्वरुप बदला है और माँ अम्बा के गीतों के साथ बॉलीवुड के डांस नम्बर्स ने भी अपनी जगह बना ली। आज यहाँ पर युवा बॉलीवुड के डांस नम्बर्स पर खूब नृत्य करते हैं। गुजरात में हर क्षेत्र में एक अलग प्रकार का गरबा देखने को मिलता है। अहमदाबाद का अलग गरबा, राजकोट का शेरी गरबा और बड़ोदा का विशाल गरबा।

[caption id="attachment_7889" align="aligncenter" width="1800"]cultural-festivals/navratri-festival-Gujrat-4 Colorful costumes & right dance moves is the key of Garba in Navratri festival Gujarat[/caption]

हमने अहमदाबाद का विशाल गरबा देखा और राजकोट के छोटे छोटे पंडाल देखे साथ ही शेरी गरबा भी देखा। शेरी गरबा को मोहल्लों में किया जाने वाला गरबा भी कहा जा सकता है। इसके लिए आपको राजकोट की गलियों में जाना होगा। छोटी छोटी लड़कियों द्वारा माँ अम्बा की स्तुतिगान और गरबा नृत्य मन को मोहने वाला होता है। गरबा यहाँ का लोक नृत्य है लेकिन आज यह पूरे विश्व में अपनी पहचान रखता है।

[caption id="attachment_7890" align="aligncenter" width="1800"]cultural-festivals/navratri-festival-Gujrat-5 Garba in Navratri festival is a festival of people in Gujarat[/caption]

देश-विदेश से लोग गरबा का मजा लेने के लिए गुजरात आते हैं। इस दौरान बड़े-बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसमें लोग पारंपरिक गानों के साथ आधुनिक गानों पर भी थिरकते हैं। लाइव बैंड के साथ लोक गायक और बॉलीवुड के गायक गीत प्रस्तुत करते हैं। पूरी रात यहाँ सड़कों पर चहल पहल रहती है। पूरा नगर नवरात्रि के रंग में डूबा होता है। लड़के लड़कियां झिलमिलाते कॉस्टयूम्स में सजे एक पंडाल से दूसरे पंडाल में डांडिया खेलने जाते हैं।

[caption id="attachment_7892" align="aligncenter" width="1024"]Garba in Navratri festival Gujarat-8 Navratri festival is very famous in the world[/caption]

फिर मिलेंगे दोस्तों, भारत की धरोहर के किसी और अनमोल रंग के साथ
तब तक आप बने रहिये मेरे साथ

[caption id="attachment_7893" align="aligncenter" width="653"]Kaynat Kazi -Garba in Navratri festival Gujarat Kaynat Kazi -Garba in Navratri festival Gujarat[/caption]


आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त
डा० कायनात क़ाज़ी

Thursday, 20 October 2016

टाइगर कंट्री-बांधवगढ़ नेशनल पार्क, मध्य प्रदेश

टाइगर कंट्री-बांधवगढ़ नेशनल पार्क, मध्य प्रदेश

wildlife; solo-felame-traveller;photography; PMTM

बचपन से ही जब भी मैं अपने परिवार के साथ साउथ इंडिया जाती थी तो ट्रेन मध्य प्रदेश के बड़े भाग को क्रॉस करती हुई जाती थी। यह हिस्सा शुरू होते ही खिड़की के बाहर का नज़ारा अपने आप बदल जाता था। यह बताने की ज़रूरत नही पड़ती थी कि हम मध्य प्रदेश में आ चुके हैं, यहाँ के घने हरयाली से भरे जंगल अपने आप इस बात की गवाही देते थे। और क्यूँ न हो इस प्रदेश को बहुमूल्य वन संपदा जो मिली हुई है। यहाँ एक नहीं दो नहीं पूरी 25 वाइल्ड लाइफ सेंचुरी हैं। ऐसी अनमोल धरोहर भारत मे किसी और राज्य के पास नहीं हैं। इसी लिए तो मध्य प्रदेश को वाइल्ड लाइफ के लिए अग्रिम माना जाता है। जब 1973 मे भारत सरकार और WWF (वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड) ने भारत में लुप्तप्राय वन्य प्रजातियों को बचाने के लिए काम करना शुरू किया तब इसकी शुरुवात मध्य प्रदेश से ही हुई। यहाँ 9 वन क्षेत्रों को टाइगर संरक्षण के लिए घोषित किया गया। आज यहाँ 5 प्रॉजेक्ट टाइगर एरिया बने हुए हैं। जैसे कान्हा, पन्ना, बंधवगार्ह, पेंच और सतपुरा।

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टाइगर के संरक्षण के लिए किए जाने वाले अथक प्रयासों का ही नतीजा है कि आज यहाँ भारत में पाए जाने वाले बाघों (टाइगर) की जनसंख्या का 19 प्रतिशत भाग रहता है और यह आँकड़ा बाघों (टाइगर) की विश्व जनसंख्या का 10 प्रतिशत है।

ऐसे ही नही मध्य प्रदेश को टाइगर कंट्री का नाम दिया गया है। मुझे भी जब मध्य प्रदेश ट्रॅवेल मार्ट अटेंड करने के लिए मध्य प्रदेश टूरिज़्म का न्योता आया तो मैं भी टाइगर कंट्री को देखने का मोह नही त्याग सकी। और इस तरहां मैं पहुँच गई बांधवगढ़। सतपुड़ा के जंगलों से आबाद बांधवगढ़। टाइगर का घर, बांधवगढ़।

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बांधवगढ़ नेशनल पार्क को 1968 मे नेशनल पार्क का दर्जा मिला था। हमने रात को भोपाल से ट्रेन पकड़ी और सुबह 5 बजे जबलपुर पहुँच गए। जबलपुर से बांधवगढ़ का रास्ता 163 किलोमीटर का है जिसे हमने लगभग 5 घंटों मे कवर किया। रास्ता बहुत लंबा नही है लेकिन खूबसूरत पहाड़ों के बीच से होकर गुज़रता है। सतपुड़ा के पहाड़ी जंगल बरबस ही अपनी ओर ध्यान आकर्षित करते हैं। यह जंगल वर्ष भर हरे रहते हैं। यहाँ सागोन और बाँस के पेड़ बहुतायत में हैं।

हम दोपहर तक मध्य प्रदेश टूरिज़्म के रिज़ॉर्ट वाइट टाइगर मे पहुँच गए थे, यह एक खूबसूरत जगह है और बांधवगढ़ नेशनल पार्क के बहुत नज़दीक है। दोपहर का भोजन कर हमने शाम की सफ़ारी पर जाने के लिए कैंटर बुक किया हुआ था। यह एक प्रकार की खुली बस होती है जिस में बैठ कर आप जंगल सफ़ारी का आनंद ले सकते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क कान्हा नेशनल पार्क से आकर मे काफ़ी छोटा है लेकिन यहाँ टाइगर की संख्या बहुत है।

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आइये कुछ मज़ेदार फैक्ट्स बांधवगढ़ नेशनल पार्क और टाइगर (बाघ) के बारे में जान लेते हैं।

  • भारत में सबसे ज़्यादा टाइगर (बाघ) बांधवगढ़ नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं

  • बांधवगढ़ नेशनल पार्क विंधयांचल की पहाड़ियों मे 450 स्क्वायर किलोमीटर के दायरे मे फैला हुआ है।

  • किसी ज़माने मे बांधवगढ़ नेशनल पार्क रीवा राजघराने का निजी (पर्सनल) अभ्यारण होता था जिसका प्रयोग शाही परिवार अपने शिकार के शौक़ के लिए करता था।

  • वर्ष 1951 में रीवा के महाराजा श्री मार्तण्ड सिंह ने इसी जंगल में एक सफ़ेद टाइगर मारा था। आज उसी सफ़ेद टाइगर को महाराजा के संग्रहालय में भूसा भर कर रखा गया है।

  • वर्ष 1968 मे इसे नेशनल पार्क का दर्जा दिया गया। और वर्ष 1972 में प्रोजेक्ट टाइगर के आने के बाद बाघों की लगातार घटती संख्या को कड़े क़ानूनों द्वारा रोक गया और इस तरह यह पार्क भारत में सबसे ज़्यादा टाइगर पॉपुलेशन के लिए जाना जाता है।

  • इस पार्क का नाम यहा के प्राचीन दुर्ग-बांधवगढ़ के नाम पर बांधवगढ़ नेशनल पार्क पड़ा।

  • बांधवगढ़ नेशनल पार्क मे जीप और कैन्टर की सफ़ारी के अलावा हाथी पर बैठ कर सफ़ारी भी की जा सकती है।

  • यह पार्क जुलाई और अगस्त के महीने को छोड़ कर पूरे साल भर खुला रहता है।

  • बांधवगढ़ नेशनल पार्क बाघ के अलावा तेंदुआ, हिरण, ब्लैक बक, चीतल और लंगूरों का घर भी है।

  • यहाँ साल भर हरे रहने वाले साल और बाँस के घने पेड़ होते हैं जो इस जंगल को हमेशा हरा भरा रखते हैं।

  • बांधवगढ़ नेशनल पार्क सबसे बड़ी जैव विविधता के लिए भी मशहूर है।

  • जिस प्रकार इंसानों में पहचान के लिए उँगलियों के निशान माने जाते हैं उसी प्रकार टाइगर के शरीर की धारियां उसकी पहचान होती हैं। यह यूनीक होती हैं। इंसानों के फिंगर प्रिंट्स की तरह।

  • इतने शक्तिशाली जानवर टाइगर को देखना रोमांच से भर देने वाला अनुभव है। लेकिन इनके जीवन के लिए भी कई ख़तरे होते हैं। जैसे जन्म के बाद नन्हे शावकों को अन्य बाघ व तेंदुए अपना शिकार बना लेते हैं। वहीं टाइगर की खाल, दांत और हड्डियां तस्करी की जाती है। इन तस्करों से भी खतरा हमेशा बना रहता है। यह लोग जंगल के पानी के स्त्रोत में ज़हर मिला देते हैं। जंगल में आग लगा देते हैं।

  • इन सभी ख़तरों से निपटने के लिए वन विभाग के कर्मचारी मुस्तैदी से जंगल की निगरानी करते हैं। इन वन प्रहरियों के कारण ही आज लुप्तप्राय इस जीव की रक्षा हो सकी है।

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जंगल सफ़ारी अपने आप मे ऊर्जा भर देती है। जंगल से आती वनस्पति की खुश्बू किसी जंगली फूल सी महकती है। इस जंगल में टाइगर के अलावा, तेंदुआ, चीतल, हिरन, लंगूर और अन्य जंगली जानवर। हमारी सफ़ारी दोपहर तीन बजे से शुरू हुई और शाम 6 बजे तक चली। पर कोई भी टाइगर नही दिखा। हम सब थोड़े निराश हो चुके थे। शाम ढल रही थी और हमने पार्क से वापसी की राह पकड़ ली थी। सफ़ारी पर आते हुए सब में जो उत्साह था अब वो ठंडा हो चुका था। टाइगर देखना इतना आसान थोड़े ही होता है। जंगल का राजा ऐसे ही दर्शन नही दे देता। पर मेरे मन में एक आस अभी भी बाक़ी थी। क़ुदरत हमेशा फोटोग्राफर का साथ देती है। ऐसा मेरा विश्वास है। कि तभी पार्क के गेट से मुश्किल से 1000 मीटर पहले हम क्या देखते हैं कि सामने अपनी पूरी आन बान और शान के साथ एक नर बाघ कच्ची रोड के बीचों बीच लेटा हुआ है। सब तरफ सन्नाटा। जैसे सबकी साँसें रुक गई हों। टाइगर को देखना एक ऐसा ही अनुभव है जिसे शब्दों मे ब्यान नही किया जा सकता केवल महसूस ही किया जा सकता है।

हम सब में खुशी और उत्साह की लहर दौड़ गई और सबने बड़े आराम से टाइगर की फोटो क्लिक की। और इस तरह बांधव गढ़ नेशनल पार्क की हमारी यात्रा सफ़ल हुई।

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फिर मिलेंगे दोस्तों, भारत की धरोहर के किसी और अनमोल रंग के साथ
तब तक आप बने रहिये मेरे साथ

आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त
डा० कायनात क़ाज़ी


Sunday, 16 October 2016

Successful culmination of Madhya Pradesh Travel Mart-2016

Successful culmination of Madhya Pradesh Travel Mart-2016

[caption id="attachment_7901" align="aligncenter" width="2048"]mptm-2016-rahagiri-com The Chief Minister of Madhya Pradesh Shri Shivraj Singh Chouhan inaugurated the Travel Mart, 2016 in Bhopal[/caption]

The three-day M.P. Travel Mart, 2016, was inaugurated by the Chief Minister, Shri Shivraj Singh Chouhan, on October 15, 2016, at 9.00 a.m. Shri Chouhan distributed awards to winners under the M.P. State Tourism Awards Distribution programme. A total of 30 awards were given in 22 categories. These awards are given in order to promote excellence in the Madhya Pradesh Tourism sector. Minister of State for Tourism and Culture (Independent Charge) and Agriculture Development and Farmers Welfare, Shri Surendra Patwa and Chairman of State Tourism Development Corporation, Shri Tapan Bhoumik, were also present on the occasion.

Around 70 hosted buyers from 28 countries, 175 domestic buyers from 54 Indian cities and a total of 61 Exhibitors, out of which 50 Sellers / Exhibitors being from Madhya Pradesh, took part in the third edition of M.P. Travel Mart. Presidents of major National Travel Trade Associations like IATO, ADTOI, ATOAI and ITTA also attended the Mart.

A platform was provided for setting up meetings amongst the attendees and more than 1900 such business meetings took place in the two days of the Travel Mart.

A special Training and Development programme was conducted for the sellers and the sales team of MP Tourism to prepare them for handling the Hosted Buyer meeting experience and to make the overall engagement with the attendees more effective.

Deliberations were held on the scope of tourism industry, how to attract more investment in it, how to increase the number of tourists and how to encourage international tourism besides hotels and hospitality in Madhya Pradesh. A presentation focusing on efforts being undertaken for enhancing tourism in Madhya Pradesh was given by the Secretary Tourism and Managing Director of Tourism Development Corporation, Shri Hari Ranjan Rao in the M. P. Travel Mart. Views were exchanged on the wide scope in tourism sector and how to accelerate tourism development in Madhya Pradesh.

Representatives of Indian Association of Tour Operators, Travel Agent Association of India, Federation of Hotel and Restaurant Association and Adventure Tour Operator Association of India, Travel Operators for Tigers, etc, took part in the M.P. Travel Mart.

An early Morning Heritage Walk was organized this time which got a tremendous response, as over 175 hosted buyers attended the Walk and experienced the interesting sights of the city of Bhopal.

MP Travel mart-2016

For the first time a live webinar was organized on “A chance for Building Partnerships in Madhya Pradesh”. Not only the attendees but also the buyers across the globe, who could not make it to the MP travel mart this time, benefited from the webinar. Several presenters made presentations to showcase Madhya Pradesh’s Wildlife, Culture and Heritage tourism.

A special Simultaneous interpretation technology was used for translating the live address of the dignitaries for the sake of international buyers who came in from the various parts of the globe.

All in all the M.P. Travel Mart was a huge success and resulted in the creation of many new opportunities in the Madhya Pradesh tourism sector.

Thursday, 6 October 2016

Gujarat gives Navratri a Grand Welcome

Ahmedabad witnessed a grand inaugural celebration of the 10 day long carnival of Navratri at the GMDC Ground on Saturday, 1st October 2016. The event was graced by the presence of the Hon’ble Chief Minister of Gujarat, Shri. Vijay Rupani, Hon’ble Deputy Chief Minister of Gujarat, Shri. Nitin Patel, Shri. Parimal Nathwani, MP, Jharkhand, Shri. Ganpatsinh Vasava, Minister of Tourism, Government of Gujarat, Shri. Shankar Chaudhary, MoS, Health and Family Welfare, Government of Gujarat, Shri. Pradipsinh Jadeja, Minister of Law, Government of Gujarat, Dr. J.N. Singh, Chief Secretary, Government of Gujarat, Shri. Kamleshbhai Patel, Chairman, Gujarat Tourism, Ambassadors of various countries and many other senior officials of the Gujarat Government.

Navratri at the GMDC Ground -Gujarat Tourism

The event was inaugurated by the Hon’ble Chief Minister by lighting the ‘Lamp of Humanity’ with a laser torch. The lamp is the largest floor lamp in the world created by Dr. Braj K. Shukla, Scientist, Institute of Plasma Research, Bhat, Gandhinagar and is set to enter the Guinness Book of World Record. The motivation behind this lamp is to deliver the message of humanity to the world based of the noble words of our Hon’ble Prime Minister, Shri. Narendra Modi, “Mana Andhera Ghana Hai, Diya Jalana Kahan Mana Hai”

Gujarat chief minister-Navratri at the GMDC Ground -Gujarat Tourism

Navratri at the GMDC Ground -Gujarat Tourism

Shri. Vasava delivered the welcome address and explained to the gathering the importance of this auspicious festival. He also congratulated the Tourism Department for having bagged the National Tourism Awards, 2016 under 3 categories. This was followed by the address by the Chief Minister who praised the Tourism Department of Gujarat for having organised such wonderful event. During his address he said, “This wonderful concept of celebrating the Navratri festival by organising events across the state was the brainchild of Shri. Narendra Modi during his tenure as the Chief Minister of Gujarat.” (Quote for approval) He also spoke about the success of the Central Government in combating terrorism and applauded the recent surgical strikes by the Indian Army.

Navratri at the GMDC Ground -Gujarat Tourism

The Chief Minister later unveiled the trophy of the Kabbadi World Cup, 2016 which will be hosted by Ahmedabad from the 7th to the 22nd October. Captains of six out of the twelve participating nations, namely Argentina, Bangladesh , Kenya , Iran , India and England were greeted by the CM by presenting them with 'Dandia Sticks' as souvenirs.

Navratri at the GMDC Ground -Gujarat Tourism

This was followed by a vibrant performance “Shakti Vandana”. The vivid display of dance and music explained the mythology behind the Navratri Festival and was an audio-visual treat for everyone present. Students from various art schools from Gujarat participated in the Shakti Vandana.

कलरीपायट्टु - प्राचीन भारतीय युद्धकला

कलरीपायट्टु - प्राचीन भारतीय युद्धकला

Kalaripayattu – The oldest martial art from South India

फोर्ट कोचीन में ऐसे कई संगठन और केंद हैं जो इस राज्य और नज़दीकी राज्यों में पाई जाने वाली कलाओं के संरक्षण में लगे हैं साथ ही वह इस कला को जीवित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं इसी कड़ी में नाम आता है कोचीन सांस्कृतिक केन्द्र Cochin Cultural Centre, यह एक ऐसा स्थान हैं जहाँ एक छत के नीचे है आपको कई कलाएं देखने को मिल जाएंगी। जैसे कथकली, मोहिनीअट्टम, भरतनाट्यम और कलरीपायट्टु।

कोचीन सांस्कृतिक केन्द्र Cochin Cultural Centre फोर्ट कोच्ची बस स्टैण्ड के बराबर, संगमम माणिकथ रोड पर स्थित है। यहाँ हर रोज़ शाम को यह नाट्य प्रस्तुतियां की जाती है। मेरी पिछली पोस्ट में अपने कथकली के बारे में जाना, इस पोस्ट में हम प्राचीन युद्धकला कलरीपायट्टु के विषय में जानेंगे। यह सारी प्रस्तुतियां एक के बाद एक की जाती हैं। आपके पास यह विकल्प होता है कि आप केवल एक नृत्य प्रस्तुति देखना चाहते हैं या कि पूरा कार्यक्रम देखना चाहते हैं। अगर आप पूरा कार्यक्रम देखना चाहते हैं तो शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक का समय आपके पास होना चाहिए।

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चलिए हम बात कर रहे थे कलरीपायट्टु, लेकिन कलरीपायट्टु है क्या ? आइये इसके इतिहास पर एक सरसरी नज़र डाल लेते हैं।


ऐसा माना जाता है कि अगस्त्य मुनि ने कलारीपयट्टू युद्ध कला का अविष्कार किया। यहाँ के लोग इस बात से जुड़ी एक कहानी भी सुनाते हैं। अगस्त्य मुनि एक छोटी कद-काठी के साधारण से दुबले पतले और नाटे इंसान थे, । उन्होंने कलरीपायट्टु की रचना खास तौर पर जंगली जानवरों से लड़ने के लिए की थी। अगस्त्य मुनि जंगलों में भ्रमण करते थे। उस समय इस क्षेत्र में काफी तादाद में शेर घूमा करते थे। शेरों के अलावा कई बड़े और ताकतवर जंगली जानवर इंसानों पर हमला कर देते थे इन हमलों से अपने बचाव के लिए अगस्त्य मुनि ने जंगली जानवरों से लड़ने का एक तरीका विकसित किया। जिसे नाम मिला-कलारीपयट्टू। इस क्रम में एक और ऋषि का नाम आता है जिन्हें हम परशुराम कहते हैं। मुनि परशुराम ने इस कला को सामरिक युद्ध कला से जोड़ा और इसके बल पर अकेले ही कितनी ही सैनाओं को हराया। परशुराम ने ही इस कला में शस्त्रों को जोड़ा। परशुराम की शिक्षा प्रणाली में सभी प्रकार के हथियारों का प्रयोग किया जाता है, जिसमें हाथ से चलाए जाने वाले शस्त्र, फेंकने वाले शस्त्र के साथ कई तरह के शस्त्र शामिल हैं। इन हथियारों में लाठी मुख्य रूप से प्रयोग में लाई जाती है।

 यह केरल राज्य की प्राचीनतम युद्ध कला है। ऐसा भी कहा जा सकता है कि यह एक ऐसी प्राचीनतम युद्ध कला है जो अभी तक जीवित है, जिसका श्रेय यहाँ के लोगों को जाता है जिन्होंने इसे अभी तक जीवित रखा है। केरल की योद्धा जातियां जैसे नायर और चव्हाण ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई है। यह जातियां केरल की योद्धा जातियां थी जोकि अपने राजा और राज्य की रक्षा के लिए इस युद्ध कला का अभ्यास किया करती थीं। कलरीपायट्टु मल्लयुद्ध का परिष्कृत रूप भी माना जाता है। इतिहासकार एलमकुलम कुंजन पिल्लै कलारी पयट के जन्म का श्रेय 11 वीं शताब्दी में चेर और चोल राजवंशों के बीच लम्बे समय तक चले युद्ध को देते हैं।

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कैसे मिला नाम ?

कलरीपायट्टु शब्द अपने आप में इस कला का बखान करता है, यह शब्द दो शब्दों को जोड़ कर बना है। पहला “कलारी” जिसका मलयालम में अर्थ होता है व्यायामशाला है, तथा दूसरा “पयाट्टू” जिसका अर्थ होता है युद्ध, व्यायाम या "कड़ी मेहनत करना"

इतिहास में नायर और चव्हाण लोग अपने बच्चों को छोटी उम्र में ही विद्या अर्जन के लिए भेज देते थे जहाँ उन्हें दिन में दो बार “कलरीपायट्टु” का अभ्यास करवाया जाता था। कम उम्र होने के कारण उन बच्चों का शरीर अत्यन्त कोमल होता था और प्रकृति के विपरीत मुड़ जाता था जिसके निरंतर अभ्यास से उनका शरीर इतना लचीला बना कि बिजली की सी तेज़ी से प्रहार करने और खुद को बचाने की कला उनमे रच बस गई। एक बार शरीर पूरी तरह तैयार हो जाने पर इन बच्चों को लाठी और हथियारों का प्रशिक्षण दिया जाता।

कलारीपयाट्टू की कई शैलियाँ हैं, जैसे उत्तरी कलारीपयाट्टू, दक्षिणी कलारीपयाट्टू, केंद्रीय कलारिपयाट्टू। ये तीन मुख्य विचार शैलियाँ अपने पर हमला करने और और सामने वाले के हमले से स्वयं को बचाने के तरीकों से पहचानी जाती हैं। इन शैलियों का  सम्बन्ध दक्षिण के अलग-अलग क्षेत्रों से है। जैसे:

दक्षिणी कलारीपयाट्टू

दक्षिणी कलारीपयाट्टू का सम्बन्ध त्रावणकोर से माना जाता है, इस शैली में हथियारों का प्रयोग वर्जित है यह स्कूल केवल खाली हाथ की तकनीक पर जोर देता है।

उत्तरी कलारीपयाट्टू

उत्तरी कलारीपयाट्टू जिसका सम्बन्ध मालाबार से है यह शैली खाली हाथों की अपेक्षा हथियारों पर अधिक बल देता है।

केंद्रीय कलारिपयाट्टू

केंद्रीय कलारिपयाट्टू का सम्बन्ध केरल के कोझीकोड, मलप्पुरम, पालाक्काड, त्रिश्शूर और एर्नाकुलम से है, इस पद्धति में दक्षिणी और उत्तरी शैली का मिलाजुला रूप देखने को मिलता है। यहाँ कोचीन सांस्कृतिक केन्द्र में इन तीन मुख्य शैलियों का प्रदर्शन किया जाता है।

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इस युद्ध कला को टीवी पर देखना और साक्षात् सामने से देखने में बहुत फ़र्क़ है। इन कलाकारों के दांव पेच देखने लायक हैं। बिजली सी तेज़ी और फुर्ती, कमाल का लचीलापन। लगता है जैसे शरीर में हड्डी ही न हो। कम उम्र के यह नौजवान अपनी कला में बड़े माहिर हैं। लोमड़ी सी चतुराई और चीते सी फुर्ती पलक झपकते ही सामने वाले को धराशायी कर देती है।

आप केरल जाएं तो ज़रूर देखें। आप कहीं मत जाइयेगा ऐसे ही बने रहिये मेरे साथ, भारत के कोने कोने में छुपे अनमोल ख़ज़ानों में से किसी और दास्तान के साथ हम फिर रूबरू होंगे।

तब तक खुश रहिये और घूमते रहिये।

आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त

डा ० कायनात क़ाज़ी


Wednesday, 5 October 2016

An innovative idea of 360-degree live-action virtual reality videos to promote tourism in the state by Gujarat Tourism

India is so big, and having so much to offer. Hence it is really difficult to choose the places among the so many destinations. Have anyone ever thought of get the actual feel of the place without visiting it? Yes, now it is very much possible  with 360-degree live-action virtual reality videos in Gujrat, an initiative by Gujrat tourism to promote tourism in the estate. One can take a sneak peak of what it would be like to be in the dense forest of Gir with so many lions around or can stroll around the Indus Valley ruins of Lothal and Dholavira.

An innovative idea of 360-degree live-action virtual reality videos to promote tourism in the state by Gujarat Tourism

A joint venture between Tourism Corporation of Gujarat and development finance company Infrastructure Leasing & Financial Services (IL&FS), has made a 360-degree immersive live-action virtual reality (VR) videos for use at tourism expos.

"The idea is to make people want to visit the destination so the videos will not be very long," said Ajay Parge, founder director at Pune-based Digital Art VRe.

To give the feel of reality, Gujrat tourism put up a kiosk of 360-degree live-action virtual reality videos at the grand Vibrant Gujarat Navratri festival in Ahmedabad Recently. The idea is to make people want to visit the destinations. "The experience is so real that will transport you to the real location. A very short video of the Gir forest was so thrilling and full of adventure when you see a big lion walking towards you" a tourist shared her experience at the grand Vibrant Gujarat Navratri festival in Ahmedabad recently.