India's First Hindi Travel Photography Blog: Home

कुछ पंक्तियां इस ब्लॉग के बारे में :

प्रिय पाठक,
हिन्दी के प्रथम ट्रेवल फ़ोटोग्राफ़ी ब्लॉग पर आपका स्वागत है.….
ऐसा नहीं है कि हिन्दी में अच्छे ब्लॉग लिखने वालों की कमी है। हिन्दी में लोग एक से एक बेहतरीन ब्लॉग्स लिख रहे हैं। पर एक चीज़ की कमी अक्सर खलती है। जहां ब्लॉग पर अच्छा कन्टेन्ट है वहां एक अच्छी क्वालिटी की तस्वीर नहीं मिलती और जिन ब्लॉग्स पर अच्छी तस्वीरें होती हैं वहां कन्टेन्ट उतना अच्छा नहीं होता। मैं साहित्यकार के अलावा एक ट्रेवल राइटर और फोटोग्राफर हूँ। मैंने अपने इस ब्लॉग के ज़रिये इस दूरी को पाटने का प्रयास किया है। मेरा यह ब्लॉग हिन्दी का प्रथम ट्रेवल फ़ोटोग्राफ़ी ब्लॉग है। जहाँ आपको मिलेगी भारत के कुछ अनछुए पहलुओं, अनदेखे स्थानों की सविस्तार जानकारी और उन स्थानों से जुड़ी कुछ बेहतरीन तस्वीरें।
उम्मीद है, आप को मेरा यह प्रयास पसंद आएगा। आपकी प्रतिक्रियाओं की मुझे प्रतीक्षा रहेगी।
आपके कमेन्ट मुझे इस ब्लॉग को और बेहतर बनाने की प्रेरणा देंगे।

मंगल मृदुल कामनाओं सहित
आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त

डा० कायनात क़ाज़ी
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गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

A day in Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh

एक दिन हिमाचली संस्कृति के नाम... 

Day-1

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh under full Moon


हिमालय से मेरा लगाव पहले प्यार जैसा है, रह-रह कर पास खींचता है। एक आकर्षण है जो वर्षों से निरंतरता बनाए हुए है। अगर कोई पूछे कि वो कौनसी एक चीज़ है जो मुझे अपने मोहपाश में बांधे रखती है? तो कहना मुश्किल होगा। क्यूंकि कोई एक चीज़ नहीं है जिसका नाम लिया जा सके। मेरे पास तो एक लम्बी फेहरिस्त है, मन को सहलाती हिमालय से आती ठंडी हवाएं, नीला आसमान, हरे पीले भूरे रंगों से सजे वन, सफ़ेद चांदनी का दुशाला लपेटे पहाड़, पहाड़ों पर मीलों फैली सड़कें, उन सड़कों के अन्धे मोड़ों पर बंधी रंगीन पताकाएं फ़िज़ा में बौद्ध श्लोकों को घोलती, सबकी सलामती की दुआ करती, पगडंडियों पर दौड़ती भेड़ें और उनके मुस्तैद शिकारी कुत्ते, कोयल की कूक, मोर की बांग, भोर का उजाला, चाय का प्याला, आधी रात का पूरा चाँद, पाईन की महक, नदी की कल-कल, चमकीली धूप, लाल टीन की छतें, सुरमई पत्तरों वाली झोंपड़ियां, जंगली गुलाब की झाड़ियां और उन पर भर-भर आते सजीले फूल, झरने और नाले, मंदिर की घंटियां और मॉनेस्ट्री से आते नम मयो हो रेंगे क्यों की गूंज, फसलों से लहलहाते खेत, खेतों में काम करते लोग, पहाड़ी गोल मटोल बच्चे, पोपले बुज़ुर्ग, कश्मीरी सेब से लाल रुखसारों वाली महिलाऐं और न जाने क्या क्या….देखा बह गई न हिमालय के मोहपाश  में, चलिए चलते हैं एक नई यात्रा पर।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh under full Moon

इस दफा पुकार हिमालय के खूबसूरत क्षेत्र-धौलाधार पर्वत श्रृंखला से आईहिमाचल का यह भाग कांगड़ा में पड़ता है। दोस्तों हम पिछली बार ब्यास सिर्किट घूम कर आए थे इस बार हम धौलाधार सर्किट देखेंगे।( ब्यास सिर्किट की पोस्ट देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।) धौलाधार सर्किट का एक बेहतरीन शहर है पालमपुर। काँगड़ा वैली में बसा यह शहर अपने में समेटे हुए है, बर्फ से ढ़के पहाड़ जोकि धौलाधार पर्वत श्रृंखला का हिस्सा हैं, बैजनाथ मंदिर, पैराग्लाइडिंग के लिए पूरी दुनियां में मशहूर बीड़ बिलिंग, चाय के बागान और कांगड़ा वैली में चलने वाली टॉय ट्रैन। पालमपुर के नज़दीक ही कई जगहें हैं जहाँ जाया जा सकता है। कुल मिला कर एक लॉन्ग वीकएंड का एक्शन पैक्ड इन्तिज़ाम।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh under full Moon

पालमपुर अच्छी तरह देखने के लिए काम से काम 2 से 3 दिन का समय होना चाहिए। दिल्ली से पालमपुर लगभग 530 किलो मीटर पड़ता है। जिसका रूट यह रहेगा:-

दिल्ली-सोनीपत-पानीपत-करनाल-कुरुक्षेत्र-अम्बाला-रूपनगर-कीरतपुरसाहिब-आनंदपुर साहिब-नंगल-ऊना-रानीताल-काँगड़ा-पालमपुर।

अगर आप अपनी कार से जाएंगे तो यह यात्रा 12-13 घंटे में पूरी होती है। पालमपुर पहुँचने के लिए सबसे अच्छा साधन है, हिमाचल परिवाहन की वोल्वो बसें। यह दिल्ली कश्मीरी गेट से चलती हैं और सीधा पालमपुर उतारती हैं। वैसे तो यह बसें दिन में कई समयों पर चलती हैं पर रात की वोल्वो सबसे अच्छी रहती है, सुबह-सुबह पालमपुर पहुंचा देती हैं।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh in the morning

वैसे तो पालमपुर के नज़दीक इतना कुछ है देखने को पर मैंने पालमपुर से थोड़ा-सा दूर एक हिमाचल हैरिटेज विलेज है वहीँ ठहरने का मन बनाया। मैं हमेशा से हिमालय में रहने वाले लोगों के जीवन को नज़दीक से देखना चाहती थी। जब कभी मैं हिमाचल में रोड ट्रिप किया करती थी और थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पड़ने वाले गांवों को देखती तो उनके घर मुझे बहुत आकर्षित करते। मैं हमेशा सोचती कि काश मैं इन घरों में कुछ दिन रह कर देख सकती उनके रेहन-सहन, संस्कृति को करीब से देख पाती, अनुभव कर पाती। पर इतने सालों में यह संभव न हो सका।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh under interiours

 फिर मुझे हिमाचल हैरिटेज विलेज के बारे में एक ख़ास दोस्त ने बताया। एक दिन बातों-बातों में हिमालय का ज़िक्र निकला तो बात चलते-चलते दूर हिमाचल हैरिटेज विलेज तक जा पहुंची। मेरे दोस्त ने बताया कि मैं सच में हिमाचल के अलग-अलग रीजन को एक ही जगह देख सकती हूं और अनुभव भी कर सकती हूं। मुझे विश्वास न हुआ। यह मुझे वहां पहुँच कर पता चला।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh under full Moon

 हिमाचल हैरिटेज विलेज एक ऐसी जगह है जिसे बड़े प्यार से हिमाचल की संस्कृति को प्रोमोट करने के लिए बनाया गया है। यहाँ चार कॉटेज हैं जिनके नाम हिमाचल के अलग-अलग गांवों के नामों पर रखे गए हैं जैसे बरोट, ऊना, काँगड़ा, धलियारा, खनियारा। और ख़ास बात यह है कि इन्हें बनाया भी उसी तरह गया है जैसे घर इन गांवों में होते हैं। बस फ़र्क़ है तो लग्ज़री का।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh 


यह एक लग्ज़री रिसोर्ट है जहाँ आपकी सुख-सुविधाओं का खास ख्याल रखा गया है। हिमाचल हैरिटेज विलेज की लोकेशन इस जगह की ख़ासियत है। पहाड़ के दामन में बना यह रिसोर्ट चांदनी रात में बहुत सुन्दर दीखता है। पीछे बर्फ से ढंके धौलाधार पर्वत श्रृंखला, दूर तक फैले पाईंन के जंगलदाईं और बहती पहाड़ी नदी, रिसोर्ट के बीच से निरंतर बहते पहाड़ी पानी के सोते, इस जगह को निरंतरता प्रदान करते हैं। यहाँ पहुँच कर कहीं जाने का मन नहीं करता।



 दिल करता है कि यहीं बैठ कर पूरा जीवन बिता दिया जाए। दिन में खिली धूप रहती है और रात में काफी ठण्ड हो जाती है। यह जगह दिल्ली से थोड़ा दूर ज़रूर है पर यहाँ पहुँच कर लगता कि इतनी दूर आना बेकार नहीं गया। हिमाचल हैरिटेज विलेज पहुँच कर सारी थकन मिट जाती है। रिसोर्ट के मालिक डोगरा जी व गगन शर्मा एक बेहतरीन होस्ट हैं। और मेहमान नवाज़ी में कोई कसर बाक़ी नहीं रखते। फिर चाहे वह हिमाचल का परम्परागत भोजन काँगड़ा धाम हो या फिर बॉन फायर का इन्तिज़ाम। ज़मीन पर बैठ कर पत्तल दावत ने समां ही बांध दिया। मुझे अपने बचपन की यादें ताज़ा हो आईं। 

Kangda Dham-Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh 

  हमने पहले दिन सिर्फ़ रिसोर्ट में रह कर थकान उतारी और बॉन फायर का मज़ा लिया। हम देर रात तक नीले आकाश तले इस हसीन वादियों का आंनद ले रहे थे। रात नर्म बिस्तर पर नींद बहुत अच्छी आई। सुबह मेरी आँख पक्षियों के कलरव से खुली। कैसी प्यारी सुबह थी। भोर का नीला-नीला उजाला और कोयल की मीठी कूक। यह यहीं हो सकता है। हरी भरी वादी में सूरज की रौशनी पाईंन के जंगलों से छन कर आने लगी।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh in the morning

 मैंने आलस छोड़ कर गरमा-गरम चाय का प्याला थाम लिया। आज बहुत कुछ देखना है। बैजनाथ मंदिर की सैर, पैराग्लाइडिंगबीड़ बिलिंग, चाय के बागान और कांगड़ा वैली में चलने वाली टॉय ट्रैन। यह था ब्यौरा पहले दिन का, अभी बहुत कुछ बाक़ी है। आप ऐसे ही बने रहिये मेरे साथ। पालमपुर डायरी के पन्नों से कुछ और क़िस्से आपके साथ साझा करुँगी अगली पोस्ट में।

तब तक खुश रहिये और घूमते रहिये

आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त


डा० कायनात क़ाज़ी

रविवार, 21 फ़रवरी 2016

रोमांच और प्रकृति से जुड़ें -गिरी कैम्प सोलन, हिमाचल प्रदेश

Giri camp

शहरी भाग दौड़ से भरी ज़िन्दगी में अगर बोरियत आ घेरे तो उसे दूर करने का सबसे सरल उपाय है कि कुछ दिन प्रकृति की गोद में गुज़ारे जाएं। जहां न कोई ऑफिस का ईमेल करने  की चिंता हो और न ही फेसबुक पर अपडेट करने की बेचैनी। एक ऐसी जगह जहां फ़ोन भी सिर्फ़ ज़रूरत भर का काम करे। कहते हैं इतने सारे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से घिरे रहने के कारण हमारे अंदर की जो Biological clock है, वह गड़बड़ा जाती है। उसे वापस से ठीक चलाने के लिए दो दिन का प्रकृति का सानिध्य काफ़ी होता है।

 जब मुझे मौक़ा मिला गिरी कैम्प जाने का तो मैंने भी अपनी Biological clock को फिर से सुचारू करने की ठान ली। और निकल पड़ी हिमाचल के ऊँचे नीचे घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर।


Giri camp

 गिरी कैम्प हिमाचल के सोलन जिले में पड़ता है। दिल्ली से चंडीगढ़ और चंडीगढ़ से हिमालयन एक्सप्रेस वे से होते हुए सोलन पहुंचा जा सकता है। सोलन के बाद से ही इस यात्रा का असल रोमांच शुरू होता है। सोलन से राजगढ़  रोड पर बीस किलोमीटर चलने के बाद लगभग 12 किलोमीटर का कच्चा पहाड़ी रास्ता शुरू होता है  और आगे जाकर गिरी नदी की तलहटी से जा मिलता है। यहाँ आकर कच्ची रोड भी समाप्त हो जाती है  और असल ट्रेकिंग शुरू होती है। नदी के सहारे सहारे हम लगभग 2-3 किलोमीटर तक चलते हैं और फिर एक ऐसी जगह पहुँचते हैं जहाँ पर कच्ची सड़क भी समाप्त हो जाती है। 
अब?

Adventure activity @ Giri Camp

Try hands on target@ Giri Camp

हम सब हैरान और थके हुए एक दूसरे की शकल देखते हैं। हमें रिसीव करने आए गिरी कैम्प के एक कर्मचारी के चेहरे पर शांत मुस्कान तिरती चली जाती है। नदी के एक किनारे हम खड़े हैं और नदी के दूसरी ओर गिरी कैम्प दिखाई देता है। कैम्प के बाहर अनुराग  जी, (कैम्प के मालिक ) हमारी अगवानी में खड़े हैं और हमारी ओर हाथ हिला कर हमारा स्वागत कर रहे हैं।
 मैंने पूछा -नाव कहाँ है ?
उसने कहा -नाव नहीं है।
 फिर ?
हम नदी को पार कैसे करेंगे ?
एक दूसरे का हाथ थाम कर -उसने कहा।
 आप घबराएं नहीं, यह नदी बहुत शांत है।
 और फिर हम हैं न....
Have fun in the water of Giri river

डर और रोमांच की एक लहर हम सब को हैरान कर गई थी। हम में से किसी ने भी ऐसा पहले कभी नहीं किया था। हमने बड़ी मुश्किल से अपने डर पर काबू पाया और नदी पार करने का फैसला किया। उन हिमाचली लड़कों की बात में जो विश्वास था हमने उसे सच माना और एक दूसरे का हाथ थामे पानी में उतरने लगे। 
पानी ठण्डा जैसे बर्फ!!!
 एक सरसराहट करंट की तरह दौड़ गई। हम सब हंस रहे थे। शायद अपने डर को काबू करने की कोशिश कर रहे थे। हर अगले क़दम पर पानी गहरा और गहरा हो रहा था। नदी के बींचों-बीच पानी मेरी कमर से ऊपर आ चुका था। हमने संभल-संभल कर क़दम बढ़ाए और  बड़ी आसानी से नदी पार की।
 किनारे तक पहुँचते-पहुँचते जिस पानी को देख कर डर लग रहा था उस पानी से थोड़ी जान-पहचान बन गई थी। गिरी कैम्प में तीन कॉटेज  और अनेक टेन्ट थे।
Play games@ Giri Camp

हरी घांस के मैदान पर  लाल रंग के सजीले छोटे-छोटे कैम्प किसी जंगली फूल की तरह बहुत सुन्दर दिख रहे थे।
 यह जगह बहुत सुन्दर है। नदी के किनारे थोड़ा  ऊंचाई पर बना गिरी कैम्प और उसके चारों ओर देवदार के पेड़ों से ढंके पहाड़ों की ऊँची ऊँची चोटियां।

Swim in the transparent water of Giri river
हमने दो दिन खुले आकाश तले  कैम्प में गुज़ारे। जिस नदी के बहाव को देख कर हम थोड़ा डर रहे थे, उसी नदी में हमने सारा समय गुज़ारा। कई वाटर स्पोर्ट्स खेले। यह नदी इतनी शांत है कि बच्चे भी स्विमिंग का मज़ा ले सकते हैं। 
Sing your favourite song at bonfire 

गिरी कैम्प के मालिक एक अच्छे होस्ट हैं और अतिथियोँ के  स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ते। फिर वह स्वादिष्ट खाना हो या चांदनी रात में बॉन फायर का इंतिज़ाम। यहाँ  आपके मनोरंजन का पूरा ध्यान रखा गया  है। गिरी कैम्प के छोटे से बगीचे में कई अमरूद के पेड़ हैं।  खूब मीठे फल आते हैं। आप मज़े से मीठे-मीठे अमरुद पेड़ से तोड़  कर खा सकते हैं। 
क्यूंकि यहाँ सब कुछ प्रकृति के अनुरूप है इसलिए बहुत लग्ज़री की उम्मीद साथ लेकर न जाएं।
 वैसे तो यहाँ वेस्टर्न स्टाइल के बाथरूम्स बने हुए हैं पर नदी का साफ चमचमाता पानी आपको नदी में स्नान करने के लिए खींच ही लेगा। हमारे देश में इतनी साफ़ और स्वच्छ नदियां बची ही कहाँ हैं। जिनका पानी शीशे की तरह साफ़ हो। आप घंटों बैठ कर इस नदी के प्रवाह को देख सकते हैं। कल कल करती इसके पानी की आवाज़ें आपका दिन बना देंगीं। 

Try your hands on small raft@ Giri Camp
यहाँ पास ही जंगल में ट्रैक करके कई वाटरफॉल्स भी देखे जा सकते हैं। प्रकृति के नज़दीक बिताये यह दो दिन आपको हमेशा याद रहेंगे।

KK@Giri camp
फिर मिलेंगे दोस्तोंअगले पड़ाव में हिमालय के 

कुछ अनछुए पहलुओं के साथ,

तब तक खुश रहिये, और घूमते रहिये,

आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त

डा० कायनात क़ाज़ी