India's First Hindi Travel Photography Blog: Home

कुछ पंक्तियां इस ब्लॉग के बारे में :

प्रिय पाठक,
हिन्दी के प्रथम ट्रेवल फ़ोटोग्राफ़ी ब्लॉग पर आपका स्वागत है.….
ऐसा नहीं है कि हिन्दी में अच्छे ब्लॉग लिखने वालों की कमी है। हिन्दी में लोग एक से एक बेहतरीन ब्लॉग्स लिख रहे हैं। पर एक चीज़ की कमी अक्सर खलती है। जहां ब्लॉग पर अच्छा कन्टेन्ट है वहां एक अच्छी क्वालिटी की तस्वीर नहीं मिलती और जिन ब्लॉग्स पर अच्छी तस्वीरें होती हैं वहां कन्टेन्ट उतना अच्छा नहीं होता। मैं साहित्यकार के अलावा एक ट्रेवल राइटर और फोटोग्राफर हूँ। मैंने अपने इस ब्लॉग के ज़रिये इस दूरी को पाटने का प्रयास किया है। मेरा यह ब्लॉग हिन्दी का प्रथम ट्रेवल फ़ोटोग्राफ़ी ब्लॉग है। जहाँ आपको मिलेगी भारत के कुछ अनछुए पहलुओं, अनदेखे स्थानों की सविस्तार जानकारी और उन स्थानों से जुड़ी कुछ बेहतरीन तस्वीरें।
उम्मीद है, आप को मेरा यह प्रयास पसंद आएगा। आपकी प्रतिक्रियाओं की मुझे प्रतीक्षा रहेगी।
आपके कमेन्ट मुझे इस ब्लॉग को और बेहतर बनाने की प्रेरणा देंगे।

मंगल मृदुल कामनाओं सहित
आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त

डा० कायनात क़ाज़ी
weekend gateway near Delhi लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
weekend gateway near Delhi लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

A day in Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh

एक दिन हिमाचली संस्कृति के नाम... 

Day-1

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh under full Moon


हिमालय से मेरा लगाव पहले प्यार जैसा है, रह-रह कर पास खींचता है। एक आकर्षण है जो वर्षों से निरंतरता बनाए हुए है। अगर कोई पूछे कि वो कौनसी एक चीज़ है जो मुझे अपने मोहपाश में बांधे रखती है? तो कहना मुश्किल होगा। क्यूंकि कोई एक चीज़ नहीं है जिसका नाम लिया जा सके। मेरे पास तो एक लम्बी फेहरिस्त है, मन को सहलाती हिमालय से आती ठंडी हवाएं, नीला आसमान, हरे पीले भूरे रंगों से सजे वन, सफ़ेद चांदनी का दुशाला लपेटे पहाड़, पहाड़ों पर मीलों फैली सड़कें, उन सड़कों के अन्धे मोड़ों पर बंधी रंगीन पताकाएं फ़िज़ा में बौद्ध श्लोकों को घोलती, सबकी सलामती की दुआ करती, पगडंडियों पर दौड़ती भेड़ें और उनके मुस्तैद शिकारी कुत्ते, कोयल की कूक, मोर की बांग, भोर का उजाला, चाय का प्याला, आधी रात का पूरा चाँद, पाईन की महक, नदी की कल-कल, चमकीली धूप, लाल टीन की छतें, सुरमई पत्तरों वाली झोंपड़ियां, जंगली गुलाब की झाड़ियां और उन पर भर-भर आते सजीले फूल, झरने और नाले, मंदिर की घंटियां और मॉनेस्ट्री से आते नम मयो हो रेंगे क्यों की गूंज, फसलों से लहलहाते खेत, खेतों में काम करते लोग, पहाड़ी गोल मटोल बच्चे, पोपले बुज़ुर्ग, कश्मीरी सेब से लाल रुखसारों वाली महिलाऐं और न जाने क्या क्या….देखा बह गई न हिमालय के मोहपाश  में, चलिए चलते हैं एक नई यात्रा पर।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh under full Moon

इस दफा पुकार हिमालय के खूबसूरत क्षेत्र-धौलाधार पर्वत श्रृंखला से आईहिमाचल का यह भाग कांगड़ा में पड़ता है। दोस्तों हम पिछली बार ब्यास सिर्किट घूम कर आए थे इस बार हम धौलाधार सर्किट देखेंगे।( ब्यास सिर्किट की पोस्ट देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।) धौलाधार सर्किट का एक बेहतरीन शहर है पालमपुर। काँगड़ा वैली में बसा यह शहर अपने में समेटे हुए है, बर्फ से ढ़के पहाड़ जोकि धौलाधार पर्वत श्रृंखला का हिस्सा हैं, बैजनाथ मंदिर, पैराग्लाइडिंग के लिए पूरी दुनियां में मशहूर बीड़ बिलिंग, चाय के बागान और कांगड़ा वैली में चलने वाली टॉय ट्रैन। पालमपुर के नज़दीक ही कई जगहें हैं जहाँ जाया जा सकता है। कुल मिला कर एक लॉन्ग वीकएंड का एक्शन पैक्ड इन्तिज़ाम।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh under full Moon

पालमपुर अच्छी तरह देखने के लिए काम से काम 2 से 3 दिन का समय होना चाहिए। दिल्ली से पालमपुर लगभग 530 किलो मीटर पड़ता है। जिसका रूट यह रहेगा:-

दिल्ली-सोनीपत-पानीपत-करनाल-कुरुक्षेत्र-अम्बाला-रूपनगर-कीरतपुरसाहिब-आनंदपुर साहिब-नंगल-ऊना-रानीताल-काँगड़ा-पालमपुर।

अगर आप अपनी कार से जाएंगे तो यह यात्रा 12-13 घंटे में पूरी होती है। पालमपुर पहुँचने के लिए सबसे अच्छा साधन है, हिमाचल परिवाहन की वोल्वो बसें। यह दिल्ली कश्मीरी गेट से चलती हैं और सीधा पालमपुर उतारती हैं। वैसे तो यह बसें दिन में कई समयों पर चलती हैं पर रात की वोल्वो सबसे अच्छी रहती है, सुबह-सुबह पालमपुर पहुंचा देती हैं।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh in the morning

वैसे तो पालमपुर के नज़दीक इतना कुछ है देखने को पर मैंने पालमपुर से थोड़ा-सा दूर एक हिमाचल हैरिटेज विलेज है वहीँ ठहरने का मन बनाया। मैं हमेशा से हिमालय में रहने वाले लोगों के जीवन को नज़दीक से देखना चाहती थी। जब कभी मैं हिमाचल में रोड ट्रिप किया करती थी और थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पड़ने वाले गांवों को देखती तो उनके घर मुझे बहुत आकर्षित करते। मैं हमेशा सोचती कि काश मैं इन घरों में कुछ दिन रह कर देख सकती उनके रेहन-सहन, संस्कृति को करीब से देख पाती, अनुभव कर पाती। पर इतने सालों में यह संभव न हो सका।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh under interiours

 फिर मुझे हिमाचल हैरिटेज विलेज के बारे में एक ख़ास दोस्त ने बताया। एक दिन बातों-बातों में हिमालय का ज़िक्र निकला तो बात चलते-चलते दूर हिमाचल हैरिटेज विलेज तक जा पहुंची। मेरे दोस्त ने बताया कि मैं सच में हिमाचल के अलग-अलग रीजन को एक ही जगह देख सकती हूं और अनुभव भी कर सकती हूं। मुझे विश्वास न हुआ। यह मुझे वहां पहुँच कर पता चला।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh under full Moon

 हिमाचल हैरिटेज विलेज एक ऐसी जगह है जिसे बड़े प्यार से हिमाचल की संस्कृति को प्रोमोट करने के लिए बनाया गया है। यहाँ चार कॉटेज हैं जिनके नाम हिमाचल के अलग-अलग गांवों के नामों पर रखे गए हैं जैसे बरोट, ऊना, काँगड़ा, धलियारा, खनियारा। और ख़ास बात यह है कि इन्हें बनाया भी उसी तरह गया है जैसे घर इन गांवों में होते हैं। बस फ़र्क़ है तो लग्ज़री का।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh 


यह एक लग्ज़री रिसोर्ट है जहाँ आपकी सुख-सुविधाओं का खास ख्याल रखा गया है। हिमाचल हैरिटेज विलेज की लोकेशन इस जगह की ख़ासियत है। पहाड़ के दामन में बना यह रिसोर्ट चांदनी रात में बहुत सुन्दर दीखता है। पीछे बर्फ से ढंके धौलाधार पर्वत श्रृंखला, दूर तक फैले पाईंन के जंगलदाईं और बहती पहाड़ी नदी, रिसोर्ट के बीच से निरंतर बहते पहाड़ी पानी के सोते, इस जगह को निरंतरता प्रदान करते हैं। यहाँ पहुँच कर कहीं जाने का मन नहीं करता।



 दिल करता है कि यहीं बैठ कर पूरा जीवन बिता दिया जाए। दिन में खिली धूप रहती है और रात में काफी ठण्ड हो जाती है। यह जगह दिल्ली से थोड़ा दूर ज़रूर है पर यहाँ पहुँच कर लगता कि इतनी दूर आना बेकार नहीं गया। हिमाचल हैरिटेज विलेज पहुँच कर सारी थकन मिट जाती है। रिसोर्ट के मालिक डोगरा जी व गगन शर्मा एक बेहतरीन होस्ट हैं। और मेहमान नवाज़ी में कोई कसर बाक़ी नहीं रखते। फिर चाहे वह हिमाचल का परम्परागत भोजन काँगड़ा धाम हो या फिर बॉन फायर का इन्तिज़ाम। ज़मीन पर बैठ कर पत्तल दावत ने समां ही बांध दिया। मुझे अपने बचपन की यादें ताज़ा हो आईं। 

Kangda Dham-Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh 

  हमने पहले दिन सिर्फ़ रिसोर्ट में रह कर थकान उतारी और बॉन फायर का मज़ा लिया। हम देर रात तक नीले आकाश तले इस हसीन वादियों का आंनद ले रहे थे। रात नर्म बिस्तर पर नींद बहुत अच्छी आई। सुबह मेरी आँख पक्षियों के कलरव से खुली। कैसी प्यारी सुबह थी। भोर का नीला-नीला उजाला और कोयल की मीठी कूक। यह यहीं हो सकता है। हरी भरी वादी में सूरज की रौशनी पाईंन के जंगलों से छन कर आने लगी।

Himachal heritage village Palampur Himachal Pradesh in the morning

 मैंने आलस छोड़ कर गरमा-गरम चाय का प्याला थाम लिया। आज बहुत कुछ देखना है। बैजनाथ मंदिर की सैर, पैराग्लाइडिंगबीड़ बिलिंग, चाय के बागान और कांगड़ा वैली में चलने वाली टॉय ट्रैन। यह था ब्यौरा पहले दिन का, अभी बहुत कुछ बाक़ी है। आप ऐसे ही बने रहिये मेरे साथ। पालमपुर डायरी के पन्नों से कुछ और क़िस्से आपके साथ साझा करुँगी अगली पोस्ट में।

तब तक खुश रहिये और घूमते रहिये

आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त


डा० कायनात क़ाज़ी

बुधवार, 23 सितंबर 2015

दा ग्रेट हिमालय कॉलिंग...दसवां दिन-कसौली

दा ग्रेट हिमालय कॉलिंग...दसवां दिन-कसौली
The Great Himalayas Calling...
Day-10











इस सीरीज़ की पिछली पोस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें: दा ग्रेट हिमालयकॉलिंग.... नवां दिन सोलांग वैली

सोलांग वैली से लौट कर हमने पीरपंजाल कॉटेज में आराम करने का फैसला किया। हमारी यात्रा अब समाप्ति की ओर है। लेकिन इस यात्रा का एक पड़ाव अभी बाक़ी है। हमने लौटे हुए कसौली जाने का तय किया और एक रात कसौली में ही गुज़ारने की सोची। ऐसा बहुत काम लोग जानते होंगे की कसौली का नाम एक फूल के नाम पर पड़ा है। इस वैली में पाया जाने वाला एक फूल "कसूल" इसी पर यहां का नाम कसौली पड़ा। कसौली का नाम लेते ही दिमाग में कोलोनियल स्टाइल की पुरानी इमारतें और एक शांत हिल टाउन की तस्वीरें आ जाती हैं। आखिर कसौली क्यों है हज़ारों लोगों की पसंद?


समुद्र तल से 5600 फिट की ऊंचाई पर बसा एक शांत नगर कसौली, इतना छोटा होते हुए भी सैलानियों को अपनी ओर खींचता रहा है। इसके कई कारण हैं। एक यह चंडीगढ़ से सिर्फ 58 किमी दूर है। दूसरा यह ऊंचाई पर बसे होने के कारण वर्ष भर हरा भरा रहता है। शायद इसीलिए इस जगह को अंग्रेज़ों ने पसंद किया होगा। और शायद इसीलिए यह यहां पर कई फिल्मों की शूटिंग हुई है। मनीषा कोइराला और अनिल कपूर की फिल्म 1947 ए लव स्टोरी यहीं फिल्माई गई थी। प्रसिद्ध लेखक रस्किन बांड का जन्म भी कसौली में ही हुआ था। इस छोटे से टाउन को अंग्रेज़ों ने छावनी के रूप में विकसित किया था। फेमस सनावर स्कूल यहां से बहुत नज़दीक है। कसौली तक पहुँचने का रास्ता पहाड़ी उत्तर चढाव से भरा हुआ है।



 लेकिन पाइन के पेड़ों से आती फूलों की ताज़ी महक आपको रास्ते की थकान महसूस नहीं होने देगी। कसौली शहर में घुसते ही हमें एक छोटा सा बाजार दिखा और उससे थोड़ा ऊपर मॉल रोड। यह मॉल रोड शिमला या नैनीताल के मॉल रोड जितना बड़ा बाजार तो नहीं पर एक छोटा सा बाजार यहां भी है। माल रोड से बाईं तरफ चर्च की बिल्डिंग थी। इस चर्च का नाम क्राइस्ट चर्च है। इस चर्च का निर्माण अंग्रेज़ों ने करवाया था। यह एक खूबसूरत ईमारत है। मैंने चर्च को अंदर जाकर देखना चाहा पर चर्च दोपहर को 12 बजे से पहले नहीं खुलता है। मुझे इसके लिए इन्तिज़ार करना होगा। 12 बजे के बाद मुझे चर्च को अंदर से देखने का मौक़ा मिला। यहाँ बहुत शांति थी।




 कसौली में देखने के लिए कई पॉइंट्स हैं जैसे मंकी पॉइंट। यह जगह सैलानियों को बहुत भाती है। मंकी पॉइंट एयरफोर्स स्टेशन में बना हुआ है। जिसके लिए घूम कर जाना होता है। इस पॉइंट का नाम मंकी पॉइंट कैसे पड़ा इसके पीछे भी एक रोचक कहानी मशहूर है। कहते हैं की जब हनुमान जी हिमालय पर्वत से संजीवनी बूटी लेकर लौट रहे थे तब उन्होंने इस स्थान को अपने पैर से छुआ था इसीलिए यहाँ का नाम मंकी पॉइंट पड़  गया है। मंकी पॉइंट से घाटी बहुत सुन्दर दिखती है। कसौली में एक दुर्गा माता का मंदिर भी है। कसौली में आप ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। यहां लोग पाइन  फोरेस्ट में ट्रेक्किंग करना बहुत पसंद करते हैं। 


अगर आप कसौली आराम करने और प्राकृतिक सुंदरता को शांति में महसूस करना चाहते हैं तो कसौली ज़रूर जाएं यह एक सुकून भरा टाउन है. यहां ठहरने के लिए कई होटल भी हैं। यहाँ के आसपास के गांवों में बड़ी ही सुन्दर कॉटेज दिखाई देती हैं। यहां भी ठहरने  की व्यवस्था की जा सकती है। कसौली में ऐसी ही एक कॉटेज में रुक कर मैंने एकांत की शांति और मीलों दूर तक फैले पहाड़ों की परतों को देखते हुए शाम गुज़ार दी। अगले दिन हमें निकलना होगा। वापस अपनी रूटीन जिंदिगी में जाना होगा।




ब्यास सर्किट की मेरी यह यात्रा कसौली पर आकर समाप्त होती है। हिमालय को देखने का मेरा यह जूनून ज़्यादा दिन तक शांत नहीं रह पाएगा और फिर निकल पड़ेगा हिमालय के कुछ और नए अनछुए पहलुओं से रूबरू होने। हमारे शास्त्रों में हिमालय को स्वर्ग का दर्जा ऐसे ही नहीं दिया गया है। यह स्वर्ग है धरती पर।




गुरुवार, 17 सितंबर 2015

दा ग्रेट हिमालय कॉलिंग.... नवां दिन सोलांग वैली

दा ग्रेट हिमालय कॉलिंग.... नवां दिन सोलांग वैली

The Great Himalayas Calling...

Day-09

Ropeway@Solang Valley

इस सीरीज़ की पिछली पोस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें:दा ग्रेट हिमालय कॉलिंग... आठवां दिन मनाली

हिडिम्बा टेम्पल देखते देखते ज़ोरों की भूख लग आई। हिडिम्बा टेम्पल से नज़दीक में ही कई बेहतरीन कैफ़े और रेस्टॉरेन्ट  हैं।  हमनें पास ही के रेस्टॉरेन्ट में जाकर लंच किया और ट्राउट फिश का आनंद लिया। मनाली आएं और यहां की फेमस ट्राउट फिश टेस्ट न करें ऐसा तो हो ही नहीं सकता।

Trout fish with smoky assorted vegetables

लंच से फ़ारिग़ होते होते आधा दिन बीत चुका था। अब हमें सोलांग वैली की ओर जाना था। मनाली शहर की भीड़ भाड़ से दूर रोहतांग पास की ओर जाने वाले रास्ते पर मनाली शहर से 14 किमी दूर स्थित है।
यह स्थान मशहूर है पहाड़ की ढ़लान के लिए जहां सर्दियों में बर्फ़ पर कई स्नो गेम्स खेले जाते हैं। यहां से लोग पैराग्लाइडिंग, स्केटिंग, ज़ोर्बिंग, स्कीइंग आदि का आनंद लेने आते हैं। गर्मियों में यहां बर्फ़ तो नही होती पर हरयाली से भरे पहाड़ी ढ़लान और सुन्दर वादियां ज़रूर होती हैं।

Bridge on the way to Solang Valley

हमने बड़ी मुश्किल से मनाली शहर के ट्रेफिक से निकल कर सोलांग वैली की राह ली। सोलांग वैली तक का रास्ता सुन्दर नज़रों से भरा हुआ था। हम लगभग आधे घंटे में सोलांग वैली तक पहुंच गए थे। यह जगह भी गाड़ियों से निकलते डीज़ल के प्रदूषण से भर चुकी है। यह स्थान इतना ज़्यादा कॉमर्शियल हो चुका है कि पहाड़ों की कुदरती सुंदरता को खोता जा रहा है। हमें पार्किंग में ही गाड़ी छोड़ कर आगे जाना होगा। यहां पर एक केबल कार भी है। जो सैलानियों को पहाड़ की चोटी तक लेकर जाती है। 

Lush green mountain top at Solang Valley

यहां पहुंचने से पहले मेरे दिमाग़ में यहां की जितनी तस्वीरें थी सब बेकार हो गईं। माउंटेन बाइकिंग के ठेकेदारों ने इतनी सारी माउंटेन बाइक्स जमा कर ली हैं कि यहां के सुन्दर ढलान (स्लोप) नष्ट हो रहे हैं। इस स्थान के रख रखाव पर बिलकुल भी धयान नहीं दिया गया है। यहां पर बेसिक फैसिलिटीज भी नदारद थीं।

Ropeway & sking center at Solang Valley

इस स्थान के मुख्य आकर्षणों में एक आकर्षण है केबल कार, जिसे रोपवे भी कहते हैं। धूल और खच्चरों की फैलाई गन्दिगी से भरे रास्ते को पार कर हम रोपवे के स्टेशन तक पहुंचे। वहां एक कामचलाऊ रेस्टॉरेन्ट भी मौजूद था। जिसमे सब कुछ बहुत मेहंगा था। रोपवे के लिए हमें 500 रूपए प्रतिव्यक्ति चुकाने पड़े। लाइन में लग कर हम रोप वे से पहाड़ के टॉप पर पहुंचे। यहां का रोपवे गुलमर्ग के रोपवे से काफी बेहतर है पर मैंने इससे बेहतर रोपवे परवाणू में टिम्बरट्रैल में देखा है। रोपवे का सफर सुहाना था। हमारे चारों ओर बर्फ से ढ़की पहाड़ों की चोटियां थीं। ऊपर जाकर देखा तो खुला हुआ घांस का मैदान था।

Snow peaked mountains at Solang Valley


KK@Solang Valley

 जहां पर लोग हिमाचली ड्रेस में फोटो खिंचा रहे थे। एक रेस्टोरेंट भी था जिसके आसपास बहुत गन्दिगी थी और बदबू भी आ रही थी। हमने मुश्किल से दस मिनट वहां गुज़ारे होंगे। इस जगह को जितना शांत और सुन्दर मैंने तसव्वुर किया था, यह जगह उतनी ही बेकार निकली। अब हिमाचल टूरिज़्म को कौन समझाए कि सिर्फ विज्ञापन में चमकीली तस्वीरें छपवाने भर से काम नहीं चलता। कोई अगर हज़ारों किलोमीटर दूर से आपके प्रदेश को देखने आ रहा है तो उसकी उम्मीदों पर खरा उतरना आपकी नैतिक ज़िम्मेदारी है।

Snow peaked mountains at Solang Valley


इस सीरीज़ की अगली पोस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें:



फिर मिलेंगे दोस्तों, अगले पड़ाव में हिमालय के कुछ अनछुए पहलुओं के साथ,


तब तक खुश रहिये, और घूमते रहिये,

आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त


डा० कायनात क़ाज़ी

मंगलवार, 8 सितंबर 2015

एक सुन्दर हिमालयन विलेज-नड्डी, हिमाचल प्रदेश


Kids@Naddi Village, Himachal

दोस्तों आज हम धौलाधार सर्किट की यात्रा में देखेंगे एक छोटे से गांव को जो बसा है बर्फ की चादर लपेटे हुए धौलाधार पहाड़ियों के अंचल में। उत्तर में धौलाधार पर्वत श्रंखला और दक्षिण में कांगड़ा वैली का विस्तार इस छोटे से गांव को अनोखा बनाते हैं। मैक्लॉडगंज की चहल पहल से सिर्फ तीन  किलोमीटर दूर धौलाधार पहाड़ियों के दिल में बसा यह गांव समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है


Dal Lake,
जब हम मैक्लॉडगंज से डल  लेक के लिए ऊपर जाएंगे तब डल  लेक के बाद और आगे जाने पर यह गांव आता है। नड्डी गांव शुरू होने से पहले ही आपको कई होटल मिल जाएंगे। इसी रास्ते पर आगे जाने पर हम गांव में पहुंचेंगे।


Dhauladhar Mountain range
इस गांव में एक मंदिर भी है। और हमारी खुश किस्मती थी कि हमें यहां एक बारात भी मिल गई। पहाड़ी लोग विदा करवा कर दुल्हन को अपने साथ ला रहे थे। हिमाचली महिलाऐं अपनी पारम्परिक पोषक और आभूषणों में बहुत सुन्दर लग रही थीं।


Himachali Bride
यह पूरा गांव सीढ़ीनुमा खेतों में फैला हुआ है। गांव के छोटे छोटे घर खेतों के आसपास ही बसे  हुए हैं। हमारे होटल की बालकनी से दिखने वाले खेत और उनके बीच बनी एक सुन्दर सी झोंपड़ी किसी बच्चे की कहानी की किताब से ली हुई जान पड़ती है।


Naddi Village, Himachal
आपाधापी से भरी रूटीन लाइफ को एक शार्ट ब्रेक देने और पहाड़ों की गोद में रिलेक्स करने के लिए नड्डी से बेहतर जगह हो ही नहीं सकती है। अगर आप सर्दियों में जाएंगे तो यहां स्नो फॉल भी देख सकते हैं। 


Dhauladhar Mountain range

मंदिर से थोड़ा आगे वैली में जाने पर सामने बर्फ से ढंके विशाल धौलाधार पर्वतों का नज़ारा हमारा इन्तिज़ार कर रहा था। बादलों के कई टुकड़े यहां वहां उड़ रहे थे. बर्फ से ढके पहाड़ों को इतनी नज़दीक से देखने का मेरा यह पहला अनुभव था.इस द्रश्य की सुंदरता को शब्दों में ब्यान नहीं किया जा सकता है। यह अनुभव करने की चीज़ है। 


KK with Himachali Bride


कैसे पहुंचे:
दिल्ली से नड्डी (मैकलॉडगंज) की दूरी लगभग 494 किलो मीटर है। रेल गाड़ी से आने वालों को पठानकोट से सड़क मार्ग चुनना पड़ता है। बस और टैक्सी यहां से आसानी से मिल जाती हैं। सड़क मार्ग से जाने वाले चंडीगढ़ होते हुए सीधे धर्मशाला और वहां से मेकलॉडगंज पहुंच सकते हैं। हवाई जहाज से जाने के लिए नज़दीकी एयरपोर्ट गगल है जोकि धर्मशाला से 15 किमी दूर है।

कहां ठहरें:
यहां ठहरने की भी कोई समस्या नहीं है। कई होटल मौजूद हैं। 

कब जाएं: 
Best time
मार्च से जून
सितम्बर से नवंबर


फिर मिलेंगे दोस्तों, अगले पड़ाव में हिमालय के कुछ अनछुए पहलुओं के साथ,

तब तक खुश रहिये, और घूमते रहिये,

आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त




डा० कायनात क़ाज़ी







सोमवार, 20 जुलाई 2015

एक दिन भागसूनाग वाटर फॉल के नाम




way to Bhagsu Waterfall, McLeod ganj, Dharamshala

बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा का निवास होने के कारण मैक्लॉडगंज में लोगों का आना जाना हमेशा ही लगा रहता है। पर यहां आने वाले ज़्यादातर लोगों को एक अनोखे स्थान के बारे में कम ही मालूम होता है। इस जगह का नाम है-भागसूनाग वाटर फॉल, यह मनोरम झरना भागसूनाग मंदिर के नज़दीक ही थोड़ी-सी ट्रेकिंग करने के बाद देखा जा सकता है। 



Bhagsu Waterfall, McLeod ganj, Dharamshala

भागसूनाग जल प्रपात की ऊंचाई लगभग 20 मीटर है। और आगे बढ़ कर यह जलधारा लगभग 100 फिट नीचे उबड़ खाबड़ पत्थरों पर गिरती है। बरसातों में इस जल प्रपात में अचानक कभी जल स्तर बढ़ने की ख़बरें भी आती रही हैं.


Bhagsu Waterfall, McLeod ganj, Dharamshala

इस जल प्रपात का पानी बहुत निर्मल और साफ़ है। सैलानी पूरा दिन इस झरने के पास बिता देते हैं। इस झरने के नज़दीक ही एक चाय की दुकान है। जहां से जलपान की व्यवस्था भी हो जाती है। लोग यहां आकर इस झरने के पानी से बने गर्म गर्म नूडल्स  खाना बहुत पसंद करते हैं। 


Bhagsu Waterfall, McLeod ganj, Dharamshala

हम ट्रैक करके पहाड़ी की तलहटी तक गए जहां से इस वॉटरफॉल का पूरा द्रश्य दिखाई दे रहा था। 


KK@Bhagsu Waterfall, McLeod ganj, Dharamshala
यहीं नज़दीक में भागसूनाग स्विमिंग पूल भी है। मई जून की तेज़ गर्मी में भी यहां बर्फ जैसा ठंडा पानी होता है.यहां रिलेक्स करते हुए सुन्दर वादी को देखना बहुत सुहाना अनुभव है। 

फिर मिलेंगे दोस्तों, अगले पड़ाव में हिमालय के कुछ अनछुए पहलुओं के साथ,

तब तक खुश रहिये, और घूमते रहिये,

आपकी हमसफ़र आपकी दोस्त




डा० कायनात क़ाज़ी